विश्व विजेता सिकन्दर की जीवनी Alexander the Great Biography in Hindi

Alexander the Great Biography in Hindi

Alexander the Great Biography in HindiAlexander the Great एक ऐसा पराक्रमी राजा था जो विश्व विजय के अभियान पर निकला था और कुछ प्रदेशो को छोडकर उसने पुरे विश्व पर विजय प्राप्त की थी इसलिए उसे विश्व विजेता सिकन्दर के नाम से जाना जाता है |विश्व विजेता सिकन्दर ने भले ही पुरे विश्व पर विजय प्राप्त की थी लेकिन वो भारत में घुसने में सफल नही हो सका था जो उसका सपना अधुरा रह गया था | सिकन्दर को अंग्रेजी भाषा में Alexander the Great कहते है लेकिन भारत वालो ने उस सिकन्दर नाम दिया था | आइये आपको उसी शूरवीर और पराक्रमी राजा सिकन्दर महान की जीवनी से रूबरू करवाते है |

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Early Life of Alexander the Great

सिकन्दर के जन्म के बारे में वास्तविक आंकड़े तो मौजूद नही है लेकिन सिकन्दर का जन्म 356 ईस्वी पूर्व माना जाता है | सिकन्दर का जन्म मेसिडोनिया साम्राज्य की राजधानी पेला में हुआ था | सिकंदर के पिता मेसिडोनिया साम्राज्य के राजा फिलिप द्वितीय थे जिनके सात-आठ रानिया थी | उन्ही सात-आठ रानियों में से चौथी रानी से सिकन्दर का जन्म हुआ था |

ऐसा माना जाता है कि जब सिकन्दर का जन्म हुआ था इफेसेस के डायाना के मन्दिर में आग लग गयी थी जो उस समय विश्व के सात अजूबो में से एक माना जता था | सिकन्दर के जन्म को अपशकुन मानते हुए ज्योतिषियों में भविष्यवाणी करते हुए कहा कि एशिया को खत्म करने वाली ताकत का जन्म हो गया है | इस तरह बचपन में ही उसके महान शशक होने के भविष्यवाणी हो गयी थी जिसे नकारा नही जा सकता था |

सिकन्दर के बचपन में उसकी देखभाल एक दाई ने की थी जो उसके भविष्य के सेनापति क्लेटिउस की बड़ी बहन थी |  सिकन्दर को बचपन में लियोनाइड्स ने पढ़ाया था को उसकी माँ का रिश्तेदार था | सिंकदर को बचपन से ही पढाई के साथ साथ युद्ध कला भी सिखाई गयी थी | सिकन्दर ने जब भी अपने पिता की विजय गाथाये सूनी तो उत्तराधिकारी बनकर राज करने के बजाय युद्ध जीतने में ज्यादा विश्वास करता था | सिकन्दर हमेशा से एक ऐसे देश का राजा बनना चाहता था जो मुसीबत में हो और उसे अपनी क्षमता दिखने का मौका मिल सके | उसे आराम बिलकुल पसंद नही था और हर समय कुछ कुछ ना करने की सोचता रहता था |

सिकन्दर जब 10 वर्ष का हुआ तक एक घोड़े का व्यापारी घोड़े बेचने के लिए राजा फिलिप के पास आया था | राजा फिलिप ने एक ऐसा घोडा पसंद किया जो कीसी के काबू में नही आ रहा था | सभी लोगो ने उस घोड़े पर बैठने से मना कर दिया तब सिकन्दर सामने आया और उसने अपने पिता से घोड़े को काबू में करने की बात कही | सिकन्दर की बात पर सभी लोग हंसने लगे क्योंकि वो सोचते थे कि इतना छोटा बालक एक उद्धंड घोड़े को कैसे काबू में ला सकता है | फिर भी सिकन्दर अपनी बात पर अडीग था तो फिलिप ने आज्ञा दे दी |

अब सिकन्दर को उस घोड़े की एक कमजोरी पता थी कि वो केवल अपनी ही परछाई से डरता था | इसलिए सबसे पहले उसने घोड़े का मुह सूरज की तरफ कर दिया फिर उसी दिशा में उसे चलाया | जब भी वो घोडा डरता सिकन्दर उसे प्यार से थप थपा देता था | थोड़ी देर बाद अचानक सिकन्दर कूदकर उस घोड़े पर चढ़ गया और मजबूती से लगाम खीच ली | अब सिकन्दर ने उस घोड़े को पुरी रफ्तार से भागने दिया और अपनी आवाज से उस पर नियन्त्रण पा लिया | सिकन्दर को घोड़े पर बैठकर वापस आते देख लोग आश्चर्यचकित हो गये और राजा फिलिप की छाती गर्व से फुल गयी |

इसके बाद जब सिंकन्दर 13 वर्ष का हुआ तब राजा फिलिप ने उसके लिए शिक्षक ढूँढना शुरू कर दिया | बहुत खोजने पर उन्हें अरस्तु मिले जो उस समय के महान विचारक थे | राजा फिलिप ने अरस्तु को सिकन्दर का गुरु बना दिया | राजा फिलिप को पता था कि साधारण शिक्षक सिकन्दर के तर्को को नही सम्भाल पायेगा इसलिए उन्होंने अरस्तु को सिंकन्दर के गुरु क्र लिय चुना था | अब अरस्तु को बुलाया गया और सिकन्दर को शिक्षा दी |  सिकन्दर को ट्रॉय की कहानी बहुत पसंद थी और वो ट्रॉय के राजा एकीलिस की तरह एक महान योद्धा बनना चाहता था | अरस्तु ने सिकन्दर को जीवन के पहलुओ की शिक्षा प्रदान की थी और उसे मानसिक रूप से मजबूत बनाया था |

Alexander War for Throne

जब Alexander सिकन्दर 16 वर्ष का हुआ तब अरस्तु की शिक्षा भी समाप्त हो चुकी थी | अब राजा फिलिप ने मेसीडोनिया का राज सिंकन्दर के हाथो में सौंपकर स्वयं बिजैन्तियम को जीतने के लिए निकल पड़े | अब राजा फिलिप की गैर मौजूदगी में मैयदी लोगो ने मेसीडोनिया के खिलाफ विद्रोह कर दिया | सिकन्दर ने तुंरत जबाबी कार्यवाही करते हुए अपनी सेना को उनके प्रदेश में भेज दिया और वहा पर यूनानी लोगो को बसाकर उसका नाम “Alexandropolis” कर दिया |

जब राजा फिलिप वापस लौटे तो उन्होंने सिकन्दर को यूनानी राज्य पेरीनेथुस पर चढाई करने के लिए भेज दिया |  अब कोरोनिया की लड़ाई में एथेंस और उसके सहयोगियों को हराकर राजा फिलिप यूनान का राजा बन गया | इस लड़ाई में सिकन्दर राजा फिलिप का सेनापति था जिसके बहुदुरी से राजा फिलिप बहुत प्रसन्न थे | उधर सिकन्दर की माँ और राजा फिलिप के बीच अनबन चल रही थी जिसके कारण राजा फिलिप ने एटलस की जवान भतीजी क्लेयोपेत्रा से शादी कर ली थी |

अब सिकन्दर की माँ ने सिकन्दर को अपने पिता के खिलाफ भडकाना शुरू कर दिया था | एक दिन शाही दावत में राजा फिलिप ने अपनी नई पत्नी क्लियोपेट्रा को यूनान का उत्तराधिकारी पैदा करने की बात कही तो सिकन्दर ने क्रोधित होकर कहा कि “मै क्या एक नाजायज औलाद हु जो आप किसी ओर को उत्तराधिकारी बनाना चाहते है ” | उस समय राजा फिलिप में काफी शराब पी रखी थी और नशे में सिकन्दर पर तलवार लेकर दौड़ पड़ा | सिकन्दर को अपने पिता के इस कृत्य पर बहुत क्रोध आया और वो अपनी माँ के साथ मेसीडोनिया छोडकर चला गया | राजा फिलिप को जब अपनी गलती का एहसास हुआ तब उसने सिकन्दर को वापस बुला लिया |

अब सिकन्दर की दुसरी पत्नी को पुत्र हुआ जिसका नाम अरिहृदयास था | उसने एक स्वस्थ बच्चे के रूप में जन्म लिया था लेकिन सिकन्दर की माँ ने विषैली दवाए देकर उसका दिमाग विक्षिप्त कर दिया था क्योंकि वो अपने पुत्र के अलावा किसी ओर को सिंहासन का उत्तराधिकारी नही देखना चाहती थी |  कुछ वर्षो बाद के बार फिर  सिकन्दर की माँ ने सिकन्दर के दिमाग में अपने पिता के खिलाफ विष घोल दिया था जिसके चलते सिकन्दर ने राजा फिलिप के खिलाफ विद्रोह कर दिया | इस बार राजा फिलिप ने सिकन्दर को देश निकाला दे दिया और उधर सिकन्दर के जाने के बाद राजा फिलिप को पौसनीय्स ने मार दिया जो फिलिप ले न्याय से नाराज था जिसको सिकन्दर की माँ ने भडकाया था | उधर सिकन्दर की माँ ने राजा फिलिप की दुसरी पत्नी क्लीओपेत्रा को मार दिया | इस तरह सिकन्दर मेसिडोनिया का राजा बन गया |

Alexander Became King

जब केवल 20 वर्ष की उम्र में Alexander सिकन्दर राजा बन गया तो जवान राजा को देखकर पडौसी राज्यों ने बगावत कर दी | अब सिकन्दर ने भी पडौसी राज्यों पर हमला कर दिया और सब कुछ शांत होने पर यूनान की तरफ निकल पड़ा | अब सिंकन्दर थीब्स की तरफ निकला जहा पर यूनानी उसके खिलाफ विद्रोह कर रहे थे | सिकन्दर ने थीब्स के विद्रोही लोगो को समर्पण करने को कहा लेकिन उन लोगो के मना करने पर नाराज सिकन्दर ने 6 हजार लोगो को मार डाला और बचे लोगो को गुलाम बनाकर बेच दिया| सिकन्दर की इस क्रूरता से यूनानियो में विद्रोह खत्म हो गया|

इसके बाद सिकन्दर ने एथेंस के लोगो के साथ दयालुता दिखाई ताकि वो थीब्स में दिखाई क्रूरता को भूल जाए | अब यूनानी भी सिकन्दर के साथ मिल गये और इरान के खिलाफ लड़ाई में उसे अपना नेता चुना | अब एक दिन सिकन्दर मार्ग में एक महान दार्शनिक डीयोजिनिस से मिला जो उस समय धुप स्नान कर रहा था | जब सिकन्दर ने उससे पूछा कि “क्या राजा आपके लिए कुछ कर सकता है ” | डीयोजिनिस ने बस इतना उत्तर दिया किब ” इतना एहसान कर दो कि अपनी परछाई से धुप को मत रोको ” | सिकन्दर उससे इतना प्रभावित हुआ था कि अक्सर कहता था कि अगर वो सिकन्दर नही होता तो डीयोजिनिस बन जाता |

Alexander enters Asia

अब सिकन्दर 40 हजार पैदल फ़ौज और 4 हजार घुड़सवारो के साथ एशिया में प्रवेश कर गया | उस समय सिकन्दर के पास सेना के लिए मात्र 30 दिन का राशन बचा था | सिकन्दर ने अपनी सारी सम्पति अपने सैनिको और उनके परिवार की देखभाल में खर्च कर दी तो सिकन्दर के सेनापति ने उनसे पूछा कि

हम जल्द ही सिकन्दर के विश्व विजय के सपने और सिकन्दर की मौत के बारे में आपको विस्तार से बताएँगे तब तक आप सिकन्दर के जीवन पर अपने विचार जरुर प्रकट करे |

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8 Comments

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  1. It is very interesting story but it is not complete plz tell the whole story by that we can know the whole victory of sikander

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