पत्थर काटने वाला A Stone Cutter Inspirational Story in Hindi

A Stone Cutter Story in Hindiएक बार की बात है एक छोटे गाँव में पत्थर काटने वाला रहता था | वह पूरा दिन काम करता रहता था और सख्त पत्थरों को तोड़ता था और ग्राहकों की जरूरत के मुताबिक़ उन पत्थरों को आकार देता रहता था | यह काम करते हुए उसके हाथ बहुत खराब और खुरदुरे हो गये थे | उसके कपड़े गंदे होते थे |एक दिन वह अपने काम के लिए एक बड़े पत्थर को तोड़ने के लिए निकला | वह बहुत मुश्किल काम था और सूरज भी बहुत चमक रहा था |

कई घंटे पत्थर काटने पर वह थक गया और पेड़ के नीच बैठ गया और जल्द ही उसे नींद आ गयी | कुछ देर बाद उसे कुछ लोगो के आने की आवाज सुनाई दी | आगे चलकर उसने देखा कि लोगो का जुलुस निकल रहा था | उस जुलुस में कई मंत्री और लोग थे | जुलुस के बीच में एक पालकी ,जिस लोगो ने उठाया हुआ था ,उसमे राजा बैठा हुआ था | पत्थर काटने वाले ने सोचा “राजा होना कितनी अच्छी बात है  | मै कितना खुश होता अगर मै एक गरीब पत्थर काटने वाले की जगह एक राजा होता ?”

जैसे ही पत्थ काटने वाले ने ये वाक्य कहा ,एक अजीब बात हुयी | पत्थर काटने वाले ने खुद को सिल्क के कपड़े और चमकते हुए गहनों में बदला हुआ देखा | उसके हाथ मुलायम थे और एक आराम दायक पालकी में बैठा हुआ था | उसने पर्दे से देखा और सोचा कि राजा बनना कितना आसान है | यह मेरे सेवक मेरी इच्छा पुरी करने के लिए मौजूद है |

जुलुस आगे बढ़ा और सूरज तेज होता जा रहा था और बहुत गर्मी हो गयी | पत्थर काटने वाले से राजा बना वह आदमी अब बहुत खुश था | उसने जुलुस को रुकने के लिए कहा ताकि कुछ देर आराम कर सके | तभी मंत्रियों ने महाराज से कहा “महाराज ! आपने आज सुबह कहा था कि आप मुझे फांसी की सजा देंगे अगर हम सूरज ढलने से पहले राजमहल ना पहुचे तो ”

पत्थर काटने वाले को उस पर रहम आया और उसने जुलुस को आगे बढने के लिए कहा | जैसे जैसे दिन बढ़ता गया , गर्मी उतनी ही बढती गयी और राजा अब असहज महसूस करने लगा | राजा ने सोचा  “मै ताकतवर हु यह सच है लेकिन सूरज मेरे से ज्यादा ताकतवर है | काश मै राजा की जगह सूरज होता ” | यह कहते ही वह सूरज में बदल गया और धरती पर चमकता रहा | उसकी नई ताकत को काबू में करना मुश्किल था |

वह इतना तेज चमक रहा था कि उसकी गर्मी से सभी खेत जल गये और समुद्र का पानी उबलने लगा और उससे बादल बन गये , जिसने धरती को घेर लिया | अब कोई फर्क नही पड़ रहा था कि वह सूरज होकर कितना तेज चमके क्योंकि बादलो में से सूरज नजर नही आ रहा था | उसने फिर सोचा “यह सही है कि बादल सूरज से ज्यादा ताकतवर है  काश मै बादल होता “|

वह यह बोलते ही बादल बन गया | वह अपनी नई ताकत का इस्तेमाल करने लगा | उसने इतनी बारिश की कि सारे खेतो में बाढ़ आ गयी | सभी ग्रह और पेड़ बर्बाद हो गये लेकिन जिस गोल पत्थर को वह काटने की कोशिश कर रहा रहा वह इस बाढ़ में हिल नही सका | उसने उस पत्थर पर बहुत पानी बरसाया लेकिन वह पत्थर हिला नही पाया |

पत्थर काटने वाला जो बादल बन चूका था ने सोचा “यह पत्थर मुझसे ज्यादा ताकतवर कैसे है सिर्फ एक पत्थर काटने वाला ही अपने हुनर से इस पत्थर को हिला सकता है | काश मै दुबारा पत्थर काटने वाला बन जाऊ “| जैसे ही उसने यह शब्द कहे , वह दुबारा से पत्थर पर बैठ गया और उसके पहले वाले खराब हाथ वापिस आ गये और अपने काम से खुश होकर उसने अपने औजार उठाये और पत्थर काटने में वापस से लग गया |

इस कहानी से हमे यह शिक्षा मिलती है कि इन्सान को अपने काम से संतुष्ट रहना चाहिए | हम अक्सर दुसरो की प्रगति को देकर हीन महसूस करने लगते है कि काश मै भी इसके जैसा होशियार होता या मै भी इसके कितने पैसे कमा रहा होता | इस अन्स्तुष्टि के कारण आप अपने काम में मन लगाकर काम नही कर पाते है और सफलता की दौड़ में पीछे रह जाते है | इसलिए मित्रो अपने काम से संतुष्ट होकर मन लगाकर अपने काम को करते रहना चाहिए और एक दिन खुद सफलता आपके कदम चूमेगी |

loading...
Loading...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *